नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क लगाये जाने के बाद रुपये में तेजी से गिरावट आयी है और दुनिया की प्रमुख मुद्राओं में यह सबसे अधिक टूटा है।

सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक की अनुसंधान इकाई एसबीआई रिसर्च ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही है। रिपोर्ट में रुपये में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव को समझाने का प्रयास किया गया है। इसमें बताया गया है कि पांच रुपये प्रति डॉलर गिरावट के मामले में 85 से 90 रुपये तक आने में सबसे कम समय लगा। रुपये को 65 से 70 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने में 1,851 दिन का समय लगा। अगले 581 दिन में यह 75 रुपये, 917 दिन में 80 रुपये और 819 दिन में 85 रुपये प्रति डॉलर तक गिरा। वहीं, 85 रुपये से 90 रुपये प्रति डॉलर तक आने में महज 349 दिन यानी एक साल से भी कम का समय लगा। भारतीय मुद्रा को 90 रुपये प्रति डॉलर से 91 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंचने में मात्र 13 दिन का समय लगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस साल के आरंभ में आयात शुल्क लगाने की घोषणा के बाद अप्रैल से अब तक रुपया 5.7 प्रतिशत टूट चुका है। यह दुनिया की प्रमुख मुद्राओं में सबसे अधिक गिरावट है। अन्य मुद्राओं में डॉलर सूचकांक 5.2 प्रतिशत, जापानी येन 3.3 प्रतिशत, फिलीपिनी पेसो 2.4 प्रतिशत और दक्षिण कोरियाई वोन 1.2 प्रतिशत गिर गया।

वहीं, कई अमेरिकी आयात शुल्क की घोषणा के बाद से कई मुद्राएं मजबूत भी हुई हैं। दक्षिण अफ्रीकी रैंड 11 प्रतिशत, यूरो 8.3 प्रतिशत, मलेशियाई रिंगिट 8.2 प्रतिशत, थाईलैंड का बहट 7.8 प्रतिशत, रूस का रुबल और पोलैंड का ज्लोटी 6.3 प्रतिशत, ब्रिताना पाउंड 3.3 प्रतिशत और चीन का युआन 3.1 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

एसबीआई रिसर्च ने कहा है कि रिजर्व बैंक ने जून-सितंबर के दौरान 18 अरब डॉलर बेचकर रुपये का सहारा दिया। इसी प्रकार अक्टूबर में भी 10 अरब डॉलर बेचने की उम्मीद है।

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