अहमदाबाद/नयी दिल्ली , दिसंबर 28 -- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा है कि विकसित भारत के निर्माण में डॉक्टरों की भूमिका अत्यंत निर्णायक होगी और मोदी सरकार एक मजबूत, सुलभ और समावेशी स्वास्थ्य तंत्र के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
श्री शाह ने यह बात अहमदाबाद में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय सम्मेलन आईएमए नैटकॉन 2025 को संबोधित करते हुये कही। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
श्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी संस्था के 100 वर्ष पूरे होना केवल गौरव का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी होता है। उन्होंने आईएमए के 100वें सम्मेलन तक पहुंचने को संगठन की त्याग, सेवा और निरंतर योगदान की परंपरा का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि आईएमए द्वारा पिछले एक शताब्दी में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाया जाना चाहिए, ताकि सेवा, कर्तव्य और समर्पण की भावना और मजबूत हो।
श्री शाह ने कहा कि जब कोई गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे डॉक्टर में ईश्वर का स्वरूप दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि 100 वर्ष पहले तय की गई चिकित्सा नैतिकताओं के कई आयाम आज के समय में अप्रासंगिक हो चुके हैं। इसलिए आईएमए को चाहिए कि वह एक विशेषज्ञ समिति बनाकर चिकित्सा नैतिकता को वर्तमान जरूरतों के अनुरूप पुनर्परिभाषित करे और उन्हें मेडिकल शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए केंद्र सरकार को सुझाव दे।
श्री शाह ने जोर देकर कहा कि नैतिकता कानून से लागू नहीं की जा सकती, यह एक नैतिक और सामाजिक विषय है। यदि आईएमए इस दिशा में नेतृत्व करे, तो आने वाली पीढ़ियों में ऐसे डॉक्टर तैयार होंगे जो सेवा को पवित्र कर्तव्य मानेंगे, जिससे डॉक्टरों के प्रति समाज का विश्वास आने वाले कई दशकों तक बना रहेगा।
श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसके लिए शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से स्वस्थ नागरिकों की आवश्यकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डॉक्टरों की भूमिका केंद्रीय और निर्णायक होगी। उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच मोदी सरकार ने समग्र दृष्टिकोण के साथ एक मजबूत स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है।
श्री शाह ने 'स्वच्छ भारत मिशन' को स्वास्थ्य सुधार की पहली सीढ़ी बताया। उन्होंने कहा कि घर-घर शौचालय बनने से स्वच्छता बढ़ी और कई बीमारियों की रोकथाम संभव हुई। इसके बाद 'फिट इंडिया, खेलो इंडिया' और 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' जैसे अभियानों से लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया और योग अपनाने वालों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
श्री शाह ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके तहत गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है, जबकि कुछ राज्यों की अतिरिक्त योजनाओं के साथ देश के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से में 15 लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार उपलब्ध है। मिशन इंद्रधनुष ने बच्चों को बचपन से ही गंभीर बीमारियों से सुरक्षित किया है।
श्री शाह ने बताया कि 2013-14 में केंद्र का स्वास्थ्य बजट 37 हजार करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 1.28 लाख रुपये करोड़ हो गया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को मजबूत करने के लिए 1.65 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। देशभर में 1.81 लाख आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (आयुष्मान मंदिर) गरीबों और ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि मेडिकल सीटों की संख्या 51 हजार से बढ़कर 1.30 लाख हो गई है। एम्स का विस्तार जारी है और जल्द ही टेलीमेडिसिन के माध्यम से एम्स से पीएचसी और सीएचसी को जोड़ा जाएगा।
श्री शाह ने कहा कि सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से मलेरिया के मामलों में 97 प्रतिशत की कमी आई है। काला-अजार में 90 प्रतिशत से अधिक सुधार हुआ है, डेंगू से मृत्यु दर घटकर 1 प्रतिशत रह गई है। मातृ मृत्यु दर में 25 प्रतिशत की कमी आई है, संस्थागत प्रसवों में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और शिशु मृत्यु दर आधी हो गई है।
श्री शाह ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान डॉक्टरों की सेवा को देश की सबसे बड़ी मानव पूंजी बताया। उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में किसी भी डॉक्टर ने अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ा और बिना अपने जीवन की परवाह किए मरीजों की सेवा की। आईएमए ने टीकाकरण, हेल्पलाइन, रक्तदान शिविर और सामाजिक जागरूकता में उल्लेखनीय योगदान दिया।
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