कोलकाता , फरवरी 28 -- कई हफ्तों की गहन राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की अंतिम सूची में शामिल कर लिया गया है।

चुनाव आयोग ने हालांकि शनिवार को जारी निर्णायक दस्तावेज में उन्हें 'प्रवासी भारतीय' के रूप में चिह्नित किया है।

यह मामला तब बड़ा विवाद बन गया था, जब चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अमर्त्य सेन को सुनवाई के लिए नोटिस भेजा। इस कदम की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी आलोचना की, जिन्होंने बार-बार आयोग पर उत्पीड़न का आरोप लगाया।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग पर हमला करते हुए इसे नोबेल पुरस्कार विजेता का 'बड़ा अपमान' और बड़े षड्यंत्र का हिस्सा बताया। विवाद के बीच चुनाव आयोग के अधिकारी श्री सेन के शांतिनिकेतन स्थित निवास 'प्रतिची' पर सुनवाई करने गये।

सुनवाई के बावजूद यह अनिश्चितता बनी रही कि उनका नाम अंतिम सूची में होगा या नहीं। शनिवार को यह अनिश्चितता समाप्त हो गयी, जब अमर्त्य सेन का नाम बनाये रखने की पुष्टि हुई।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पिछले साल नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी। इसके बाद जिलों में सुनवाई हुई। जल्द ही आरोप लगे कि मामूली विसंगतियों के लिए भी नोटिस जारी किये जा रहे हैं। श्री सेन के अलावा अभिनेता-सांसद देव और भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को भी नोटिस भेजे जाने की खबरें आयीं, जिसने राजनीतिक प्रतिक्रिया को और बढ़ाया।

बोस्टन में रहने वाले लेकिन भारतीय नागरिक श्री सेन ने निर्धारित समय के भीतर अपनी गणना फॉर्म जमा कर दी थी। अमेरिका से उन्होंने एसआईआर के संचालन के तरीके पर गंभीर चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि मतदाताओं को दस्तावेज पेश करने के लिए अपर्याप्त समय देना भारतीय लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित