कोलकाता , मार्च 30 -- तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता पंजीकरण में कथित अनियमितताओं पर गंभीर चिंता जतायी।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर भी सवाल खड़े किये।
वॉट्सएप चैनल पर पोस्ट में श्री बनर्जी ने कहा, "हम जो देख रहे हैं वह बेहद चिंताजनक है। बंगाल के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के समन्वित प्रयासों के संकेत मिल रहे हैं। इसके केंद्र में भाजपा है और ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग ने इससे अपनी आंखें मूंद रखी है।" उन्होंने आगे कहा, "लोगों को यह जानने का हक है कि उनके वोटों का क्या हो रहा है। यह कोई छोटा मुद्दा नहीं है। यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना से जुड़ा है।"तृणमूल कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनकी पार्टी को कई जिलों से 'विश्वसनीय रिपोर्ट' मिली हैं, जिनमें बड़ी संख्या में फॉर्म-6 (नये मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए उपयोग किया जाने वाला फॉर्म) जमा किये गये हैं। उन्होंने कहा, "ये सामान्य बढ़ोतरी नहीं है। ऐसी गंभीर आशंकाएं हैं कि इनमें से कई प्रविष्टियां उन व्यक्तियों से जुड़ी हो सकती हैं, जिनका बंगाल से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। ऐसे लोग, जो न यहां रहते हैं, न यहां काम करते हैं और न ही इस राज्य में उनका कोई सरोकार है।"इस संदर्भ में प्रसारित हो रहे वीडियो का हवाला देते हुए श्री बनर्जी ने कहा, "यह इन चिंताओं को और बढ़ाता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो में 'हजारों ऐसे फॉर्मों को प्रोसेस और इकट्ठा करते' दिखाया गया है, जो इस पूरी कवायद के पैमाने और मंशा पर सवाल उठाता है। उन्होंने अन्य राज्यों के उदाहरण देते हुए चेतावनी दी, "हमने चुनावों के दौरान अन्य राज्यों में भी ऐसी ही चिंताएं उठते देखी हैं। बंगाल को उस रास्ते पर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।"इस मुद्दे को दलीय राजनीति से ऊपर बताते हुए श्री बनर्जी ने जनता से इसकी बारीकी से जांच करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "इसे देखने के लिए थोड़ा समय निकालें। सवाल पूछें। क्योंकि यह केवल राजनीति के बारे में नहीं है। यह हमारे वोट की अखंडता की रक्षा करने के बारे में है। यही वह 'परिवर्तन' है, जिसे भाजपा बंगाल पर थोपना चाहती है।" उन्होंने चुनाव निकाय से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा, "चुनाव आयोग को जवाब देना होगा।"ये आरोप पश्चिम बंगाल में बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आये हैं, जहां चुनावों से पहले मतदाता सूची और चुनावी अखंडता से जुड़े सवाल अक्सर सामने आते रहते हैं। चुनाव आयोग ने पहले भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में संशोधन स्थापित प्रक्रियाओं और सत्यापन तंत्र के तहत ही किया जाता है, ताकि सटीकता और पारदर्शिता बनी रहे।
चुनाव पर्यवेक्षकों का कहना है कि फॉर्म-6 प्रविष्टियों को लेकर चिंताएं राज्य में एक आवर्ती मुद्दा रही हैं, जहां राजनीतिक दल अक्सर प्रतिद्वंद्वियों पर चुनावी लाभ के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि श्री बनर्जी के इन ताजा आरोपों से मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया पर निगरानी और सख्त होने की संभावना है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित