लखनऊ , मार्च 19 -- उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों की मरम्मत का खर्च अभियंताओं और अवर अभियंताओं के वेतन से वसूलने के आदेश का विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने तीखा विरोध किया है। समिति ने इसे अन्यायपूर्ण, अव्यावहारिक और दमनकारी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का आरोप है कि यह कदम प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ करने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि प्रबंधन सुनियोजित तरीके से कर्मचारियों और अभियंताओं का उत्पीड़न कर भय का माहौल बना रहा है।
समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफार्मर खराब होने के पीछे कई तकनीकी कारण होते हैं, जिनमें ओवरलोडिंग प्रमुख है। ओवरलोडिंग की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है, क्योंकि पर्याप्त क्षमता के ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराना और लोड प्रबंधन सुनिश्चित करना उसी के दायरे में आता है। बिना तकनीकी जांच के सीधे वेतन से वसूली करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी कहा कि सेवा नियमावली में लापरवाही सिद्ध होने पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन वेतन से मरम्मत खर्च वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में यह आदेश असंवैधानिक और मनमाना है।
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