श्रीगंगानगर , दिसम्बर 29 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच एथेनॉल संयंत्र के निर्माण को लेकर स्थानीय निवासियों का विरोध तेज हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले टिब्बी क्षेत्र के गांव राठीखेड़ा में प्रस्तावित 40 मेगावाट क्षमता वाले बड़े संयंत्र का विरोध सफल होने के बाद अब संगरिया तहसील में एक छोटी क्षमता वाले इसी तरह के संयंत्र के खिलाफ आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। स्थानीय किसान, मजदूर और ग्रामीण इस संयंत्र को किसी भी हाल में लगने नहीं देने पर अड़े हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे पर्यावरण प्रदूषण, भूजल की गुणवत्ता में गिरावट और फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
इस संयंत्र का निर्माण एक ही निजी कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जिसने पहले गांव राठीखेड़ा में लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से 40 मेगावाट का संयंत्र लगाने की योजना बनायी थी। स्थानीय निवासियों के भारी विरोध के बाद हालांकि सरकार द्वारा परियोजना की समीक्षा और कंपनी द्वारा खुद इस योजना को त्याग देने के बाद वह परियोजना रद्द हो गयी।
अब संगरिया तहसील के ग्राम पंचायत सिंहपुरा के चक 27 एएमपी में इस कंपनी द्वारा एक छोटी क्षमता वाले एथेनॉल संयंत्र का निर्माण कार्य चल रहा है। कंपनी ने यहां किसानों से जमीन खरीदी है और संयंत्र की चारदीवारी भी बन चुकी है, लेकिन गांव राठीखेड़ा वाले घटनाक्रम ने आसपास के इलाकों में ग्रामीणों को आशंकित कर दिया है, जिसके चलते संगरिया और साथ लगते श्रीगंगानगर जिले के सादुलशहर तहसील क्षेत्र के करीब 30 गांवों के लोग अब इस संयंत्र के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एथेनॉल संयंत्र के संचालन से न केवल वायु और जल प्रदूषण बढ़ेगा, बल्कि आसपास की कृषि भूमि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। फसलों की पैदावार कम हो सकती है और स्वास्थ्य समस्याएं जैसे सांस की बीमारियां, त्वचा रोग और अन्य पर्यावरणीय खतरे उत्पन्न हो सकते हैं। पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर गठित एक संघर्ष समिति सक्रिय हो गयी है, जो गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रही है। समिति के सदस्य संयंत्र के संभावित खतरों के बारे में जानकारी दे रहे हैं और लोगों को विरोध में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के प्रमुख सदस्य एवं अखिल भारतीय किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष कौरसिंह सिद्धू ने आज बताया कि पिछले दिनों किसान नेताओं ने बुधरवाली, दूदाखीचड़, खाटसजवार, कालवासिया (प्रतापपुरा), हथियांवाली और खैरूवाला जैसे गांवों में नुक्कड़ सभाएं आयोजित कीं।
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