जोधपुर , जनवरी 29 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने संसद में प्रस्तुत राष्ट्रपति के अभिभाषण और आर्थिक सर्वेक्षण-2026 के मुद्दे पर कहा है कि ये दोनों दस्तावेज इस बात के अकाट्य प्रमाण हैं कि भारत अब तात्कालिक समाधानों की राजनीति से ऊपर उठकर, एक समावेशी और दीर्घकालिक विकसित भारत की नींव रख चुका है।
श्री शेखावत गुरुवार शाम यहां सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने कहा कि विकास को अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आए सुधार से मापा जा रहा है। उन्होंने वैश्विक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि जहां दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं महंगाई और मंदी से जूझ रही हैं वहीं भारत ने एक आर्थिक नजीर पेश की है। पिछले एक दशक में दहाई अंकों में रहने वाली महंगाई को 4-4.5 प्रतिशत के दायरे में सीमित रखना मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कभी फोन बैंकिंग और एनपीए के पहाड़ से दबे भारतीय बैंक आज पूरी तरह स्वस्थ हैं। एनपीए अपने सर्वकालिक न्यूनतम स्तर पर है और बैंकों की बैलेंस शीट आज निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है।
राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए श्री शेखावत ने कहा कि पिछले वर्षों में 25 करोड़ लोगों का गरीबी रेखा से बाहर आना सामाजिक न्याय की एक ऐतिहासिक वैश्विक घटना है। चार करोड़ पक्के आवास (32 लाख केवल पिछले एक वर्ष में) और 12.5 करोड़ परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराना, सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि डीबीटी के माध्यम से 6.75 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने से भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार हुआ है।
कृषि क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों को रेखांकित करते हुए श्री शेखावत ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध, चीनी और दलहन उत्पादक देश बन गया है। चावल उत्पादन में हमने चीन को पछाड़कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है कृषि जीडीपी में पशुधन का योगदान चार प्रतिशत से बढ़कर सात प्रतिशत हो गया है। प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई 'नीली क्रांति' के चलते मत्स्य उत्पादन में 105 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि आज भारत का विकास 'अवसंचना आधारित' है। देश में 150 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन हो रहा है और एक हजार किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क भारत को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश बनाता है। अष्टलक्ष्मी (पूर्वोत्तर भारत) अब विकास का नया इंजन है। वहां 50 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कें और 80 हजार करोड़ रुपए का रेलवे निवेश ऐतिहासिक है। असम में निर्मित सेमीकंडक्टर चिप्स भारत की तकनीकी क्षमता का नया वैश्विक चेहरा हैं।
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