नारायणपुर , मार्च 23 -- छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र के जटलूर गांव में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 38वीं वाहिनी की ओर से पहली बार निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया।

दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में आयोजित इस शिविर से स्थानीय ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली और सैकड़ों पशुओं का उपचार किया गया। आईटीबीपी से सोमवार को मिली जानकारी के अनुसार,जटलूर स्थित सीओबी की ओर से आज आयोजित इस जनकल्याणकारी शिविर का संचालन 38वीं वाहिनी के कमांडेंट रोशन सिंह असवाल के निर्देशन में किया गया। शिविर में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ राजबीर सिंह, जटलूर के निरीक्षक बाग हुसैन तथा सीओबी के अन्य जवानों ने सक्रिय भूमिका निभाई। पशु चिकित्सा शिविर में ग्रामीणों के पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यक टीकाकरण और निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। शिविर के दौरान कुल 343 पशुओं का उपचार किया गया। इनमें 42 कुत्ते, 46 सूअर, 179 मुर्गे, 26 बकरियां और 50 गायें शामिल रहीं। पशुओं की जांच के साथ-साथ पशुपालकों को पशुओं की देखभाल, बीमारियों की रोकथाम और टीकाकरण के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।

ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शिविर में भाग लिया और अपने पशुओं का उपचार कराया। अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ इलाके में पशु चिकित्सा सुविधाएं बेहद सीमित होने के कारण यह शिविर स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। ग्रामीणों ने इस पहल के लिए आईटीबीपी का आभार जताते हुए कहा कि इस प्रकार के शिविरों से पशुधन की सुरक्षा और आजीविका में काफी मदद मिलती है।

आईटीबीपी अधिकारियों ने बताया कि बल केवल सुरक्षा दायित्वों का ही निर्वहन नहीं कर रहा है, बल्कि दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण के लिए भी लगातार प्रयास कर रहा है। पशुपालन और पोल्ट्री स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है, इसलिए पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल अत्यंत आवश्यक है।

आईटीबीपी की ओर से समय-समय पर इस प्रकार के जनहितकारी कार्यक्रम आयोजित कर ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और पशुपालन से संबंधित सहायता प्रदान की जाती है। जटलूर में आयोजित यह पशु चिकित्सा शिविर भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना और मजबूत हुई है।

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