रायपुर , अप्रैल 04 -- छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के समोदा में सामने आए अवैध अफीम खेती प्रकरण को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। निलंबित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को विभागीय जांच रिपोर्ट आने से पहले ही बहाल किए जाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में प्रारंभ से ही जांच की दिशा को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को प्राथमिकी में तीसरे क्रम पर सह-आरोपी बनाया गया, जिससे उसे न्यायिक प्रक्रिया के दौरान लाभ मिल सके। वहीं, आरोपी से जुड़े एक कृषि मजदूर को मुख्य आरोपी के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई।
बैज ने कहा कि कार्रवाई से पूर्व अफीम के फलों को कंटेनरों में भरकर कहीं भेजे जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वह सामग्री कहां गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अफीम के पौधों को गेहूं और मक्का जैसी फसलों के रूप में प्रस्तुत किया गया और इस प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारी को जांच पूरी होने से पहले ही बहाल कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में अवैध अफीम खेती के कई मामले सामने आ चुके हैं। नगरी-सिहावा क्षेत्र में बिना मामला दर्ज किए साक्ष्य नष्ट किए जाने का आरोप है, जबकि बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में भी ऐसे मामलों में राजनीतिक संलिप्तता की बात सामने आई है।
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