रायपुर , मार्च 09 -- छत्तीसगढ़ में दुर्ग जिले के पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा गांव में बड़े पैमाने पर अफीम की अवैध खेती के मामले को लेकर राज्य विधानसभा के बजट सत्र 2026-27 में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्षी सदस्यों द्वारा स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से मुद्दा उठाए जाने के बाद गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में विस्तृत वक्तव्य देते हुए मामले की पूरी कार्रवाई और राज्य में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी।
श्री शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सदन में प्रस्तुत स्थगन प्रस्ताव क्रमांक 35-69 में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित 34 अन्य विधायकों ने दुर्ग जिले में कथित तौर पर अफीम की अवैध खेती का मामला उठाते हुए इस पर तत्काल चर्चा की मांग की। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा गांव में शिवनाथ नदी के किनारे स्थित एक फार्म हाउस में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही थी और इसे छिपाने के लिए खेत के चारों ओर मक्का और गेहूं की फसल लगाई गई थी। साथ ही परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने और बाहरी लोगों की आवाजाही रोकने के लिए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया।
गृहमंत्री ने अपने वक्तव्य में बताया कि दुर्ग पुलिस को 06 मार्च को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पुलगांव थाना क्षेत्र के समोदा गांव में स्थित एक फार्म हाउस में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल), आबकारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ संयुक्त टीम बनाकर मौके पर छापेमारी की। उन्होंने कहा कि मादक औषधि एवं मनोरोगी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की गई लेकिन अंधेरा होने के कारण स्थल को सुरक्षित रखते हुए अगले दिन न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई जारी रखी गई।
श्री शर्मा ने बताया कि 07 मार्च 2026 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की उपस्थिति में संयुक्त टीम ने दोबारा घटनास्थल पर पहुंचकर जप्ती की कार्रवाई की। मौके से अफीम के पौधे, फूल और पत्तियों सहित कुल 62,424.4 किलोग्राम सामग्री जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7.8 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस मामले में विकास विश्नोई, मनीष ठाकुर और विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार कर उसी दिन न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। चौकी जेवरा सिरसा, थाना पुलगांव में अपराध क्रमांक 247/26 के तहत एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 18 में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले से जुड़े दो फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीम जोधपुर, राजस्थान भेजी गई है।
सदन को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने राज्य में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई का ब्यौरा भी रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 से फरवरी 2026 तक राज्य में अवैध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े कुल 2947 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 5177 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने 47,240 किलोग्राम गांजा, 370 ग्राम ब्राउन शुगर, 3052 ग्राम अफीम, 2385 ग्राम हेरोइन, 156 ग्राम चरस, 211 ग्राम कोकीन, 130 ग्राम एमडीएमए, 5760 किलोग्राम डोडा तथा 7,15,298 नग अन्य नशीली दवाइयां जब्त की हैं।
उन्होंने बताया कि मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए राज्य के सभी जिलों में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके अलावा 10 जिलों में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के लिए 100 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों में अब "एंड टू एंड" जांच की जा रही है, जिसमें आरोपियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों और सप्लायरों के खिलाफ वित्तीय जांच भी की जा रही है। फरवरी 2026 तक इस तरह की कार्रवाई के तहत 20 आरोपियों की लगभग 16.7 करोड़ रुपये की संपत्ति सफेमा कोर्ट के माध्यम से फ्रीज कराई गई है।
श्री ने कहा कि पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई को तेज किया गया है। वर्ष 2024 से पहले इस अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई नहीं हुई थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में 145 आदतन आरोपियों के खिलाफ इस कानून के तहत कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि ड्रग डिस्पोजल कमेटी के गठन के बाद जब्त मादक पदार्थों के नष्टीकरण की प्रक्रिया भी तेज हुई है। वर्ष 2024 में 2185 और वर्ष 2025 में 2591 मामलों में जब्त मादक पदार्थों का विधिवत नष्टीकरण किया गया।
इसके अलावा अवैध तस्करी में प्रयुक्त वाहनों पर भी कार्रवाई की जा रही है। गृहमंत्री के अनुसार पिछले दो वर्षों में 296 वाहनों को राजसात किया गया और उनमें से 150 वाहनों की नीलामी से लगभग 95.8 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चला रही है। "मानस" टोल फ्री नंबर 1933 जारी कर नागरिकों से शिकायत और सूचना देने की अपील की गई है। स्कूलों, कॉलेजों, गांवों और सार्वजनिक स्थलों पर जनचौपाल, बैनर-पोस्टर और सोशल मीडिया के माध्यम से नशामुक्ति अभियान लगातार चलाया जा रहा है।
गृहमंत्री शर्मा ने अंत में कहा कि राज्य सरकार अवैध नशीली दवाइयों, गांजा और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विभाग की ठोस कार्रवाई से मादक पदार्थों के सप्लाई और डिमांड नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है और इस तरह के अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
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