नयी दिल्ली , दिसंबर 17 -- राज्य सभा ने पुराने या अप्रासंगिक बन चुके कुल 71 कानूनों और कानूनी संशोधनों के निरसन तथा संशोधन के लिए प्रस्तुत निरसन एवं सशोधन विधेयक 2025 को बुधवार को बिना किसी संशोधन के पारित कर दिया।

इसके साथ ही इस विधेयक पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गयी है। लोक सभा ने इसे मंगलवार को पारित किया था।

राज्य सभा में इस विधेयक पर करीब 45 मिनट की संक्षिप्त चर्चा पर विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के जवाब के बाद सदन ने ध्वनि मत से विधेयक को स्वीकृति प्रदान की। श्री मेघवाल ने अपनी चर्चा के संक्षिप्त जवाब में कहा कि मोदी सरकार कारोबार में आसानी के साथ लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए लगातार ऐसे कानूनों को खत्म करती आ रही है जो अनावश्यक या अनुपयोगी हो चुके हैं।

श्री मेघवाल ने कहा कि मोदी सरकार से पहले संप्रग की पहली और दूसरी सरकारों में ऐसा एक भी विधेयक नहीं लाया गया था, शायद उस समय इसे सोचा भी नहीं गया था। उन्होंने कहा, " हम कारोबार में आसानी के साथ साथ लोगों के जीवन को आसान बनाने को भी प्राथमिकता देते है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में सामान्य उपबंध अधिनियम 1897 और दीवानी प्रक्रिया अधिनियम 1908 में नोटिस भेजने में 'रजिस्टर्ड पोस्ट' की जगह 'स्पीड पोस्ट' के इस्तेमाल का प्रावधान इसलिए करना पड़ा है क्योंकि डॉक विभाग ने रजिस्टर्ड पोस्ट की सुविधा खत्म कर दी है।

इससे पहले विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस पार्टी के विवेक के तन्खा ने इस प्रावधान की आलोचना करते हुए कहा था कि इससे उनके राज्य मध्य प्रदेश के जबलपुर में कई दिन से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं क्योंकि राज्य में स्पीड पोस्ट के केवल दो केंद्र हैं जो भोपाल और इंदौर में हैं।

श्री मेघवाल ने अदालतों में लम्बित मामलों की भरमार और न्यायाधीशों की कमी के बारे में सदस्यों की चिंता का जवाब देते हुए कहा कि यह मोदी सरकार है जिसने पंचनिर्णय, मध्यस्थता और सुलह जैसे -विवाद समाधान के वैकल्पिक उपाय (एडीआर) और ई- अदालत जैसी व्यवस्थाएं प्रारंभ की है। यह मोदी सरकार ही है जिसने उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ायी है।

इससे पहले विधेयक प्रस्तुत करते हुए विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि यह सरकार अब तक इस तरह की विधायी प्रक्रिया अपना कर कुल 1577 काूननों और कानून संशोधनों का निरसन एवं संशोधन कर चुकी है। इनमें 1562 को पूरी तरह से निरस्त किया गया है और 15 में संशोधन किये गये हैं।

निरसन एवं संशोधन विधेयक 2025 में 71 अधिनियमों और संशोधनों को रद्द या संशोधित करने का प्रस्ताव है जिनमें छह प्रधान अधिनियम शामिल हैं। इनमें भारतीय ट्रामवे अधिनियम, 1886, लेवी चीनी मूल्य समानीकरण निधि अधिनियम, 1976, ब्रिटानिया इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (मोकामा यूनिट) और आर्थर बटलर एंड कंपनी (मुजफ्फरपुर) लिमिटेड (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1978 , चपरमुख-सिलघाट रेलवे लाइन और कटकहल-लालबाजार रेलवे लाइन (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1982, हुगली डॉकिंग एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1984 तथा भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (कर्मचारियों की सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1988 शामिल है।

इसके साथ ही मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2015, मजदूरी भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2017, शत्रु संपत्ति (संशोधन और सत्यापन) अधिनियम, 2017, मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम, 2017, कर्मचारी मुआवजा (संशोधन) अधिनियम, 2017, बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2017, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (संशोधन) अधिनियम, 2018 तथा उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (वेतन और सेवा की शर्तें) संशोधन अधिनियम, 2018, ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम, तथा 2018, विशिष्ट राहत (संशोधन) अधिनियम, 2018 जैसे 65 संशोधन विधेयक शामिल है जिनका निरसन या संशोधन किया जा रहा है।

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