शिमला , मार्च 25 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायलय ने राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सांसद समेत भारत निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार, हिमाचल प्रदेश सरकार और रिटर्निंग अधिकारी को नोटिस जारी करते हुए आगामी 21 मई तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बी.सी. नेगी की पीठ ने संबंधित मामले में सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।

याचिकाकर्ता विनय शर्मा ने आरोप लगाया है कि श्री अनुराग शर्मा राज्यसभा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे, क्योंकि नामांकन पत्र दाखिल करते समय कथित तौर पर सरकार के साथ उनके संविदात्मक अनुबंध जारी थे। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9ए का हवाला देते हुए याचिका में तर्क दिया गया है कि नामांकन के समय जिस किसी भी व्यक्ति के पास कोई सक्रिय सरकारी अनुबंध होता है, वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है।

याचिका के अनुसार जब श्री अनुराग शर्मा ने अपना नामांकन दाखिल किया था, तब उनके पास सात सक्रिय सरकारी अनुबंध थे, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी इन पहलुओं की ठीक से जांच करने में विफल रहे और उन्होंने उनका नामांकन स्वीकार कर लिया।

याचिकाकर्ता ने इन आधारों पर चुनाव को रद्द और अमान्य घोषित करने की न्यायालय से मांग की। याचिका में आगे यह भी तर्क दिया गया है कि यदि उस समय ऐसे अनुबंधों का अस्तित्व साबित हो जाता है, तो यह कानून के तहत स्पष्ट अयोग्यता मानी जाएगी और इससे सांसद के रूप में उनके पद पर बने रहने पर भी असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि लोक निर्माण विभाग के पूर्व ठेकेदार श्री अनुराग शर्मा ने अपने नामांकन हलफनामे में लगभग 23.64 करोड़ रुपये के सरकारी अनुबंधों का खुलासा किया था। इनमें से 12.58 करोड़ रुपये के दो अनुबंध कथित तौर पर गत 19 फरवरी को यानी नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से कुछ ही समय पहले दिए गए थे।

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने भी निर्वाचन आयोग में एक शिकायत दर्ज की गई थी, जिसमें संपत्ति के विवरण को छिपाने का आरोप लगायायह मामला अभी सुनवाई के प्रारंभिक चरण में है और सभी संबंधित पक्षों द्वारा जवाब दाखिल किए जाने के बाद कानूनी स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

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