नयी दिल्ली , जनवरी 29 -- आधुनिकता के साथ तेजी से बदलती जीवनशैली, अनियंत्रित खानपान और बढ़ता प्रदूषण युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है।

विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार इसके कारण हृदय और सांस से जुड़ी बीमारियां अब कम उम्र के लोगों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। जो बीमारियां पहले 50-60 वर्ष की आयु में देखी जाती थीं, वह अब 20 और 30 की उम्र में ही सामने आने लगी हैं।

दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में गुरुवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में चिकित्सकों ने यह बात बतायी। कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरैसिक सर्जरी के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धीरज झाम्ब ने कहा कि हृदय रोग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझना होगा कि हृदय की बीमारी केवल उम्र से जुड़ी समस्या नहीं है। आंकड़ों के अनुसार, पहले हार्ट अटैक के मामलों में 40 साल से कम उम्र के लोग 10 में 1 होते थे, लेकिन अब यह अनुपात बढ़कर 5 में 1 हो गया है। अत्यधिक जिम वर्कआउट, मैराथन जैसी गतिविधियों में शरीर की क्षमता से ज्यादा दबाव, तैलीय और प्रोसेस्ड फूड, नींद की कमी और लगातार मानसिक तनाव इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसे में किसी भी तरह की परेशानी होने पर मरीज को डॉक्टर से संपर्क करना चाहिये।

वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय अग्रवाल ने कहा कि युवाओं का यह मान लेना कि उनको हार्ट की बीमारी नहीं हो सकती, बेहद खतरनाक सोच है। इन दिनों 20 के अंतिम और 30 की उम्र के मरीजों में भी हार्ट अटैक और गंभीर ब्लॉकेज के मामले देखे जा रहे हैं। इसका कारण खराब खानपान, अत्यधिक तैलीय भोजन, धूम्रपान, वेपिंग, नींद की कमी और वायु प्रदूषण-खासकर पीएम 2.5-कम उम्र में ही धमनियों में वसा जमने की प्रक्रिया को तेज कर रहे हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित