नयी दिल्ली , अप्रैल 22 -- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने यहाँ पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) साजिश मामले के आरोपी इकबाल इब्राहिम खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने एनआईए की ओर से रिकॉर्ड पर रखे गए डिजिटल साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत ने पाया कि यह मानने के उचित आधार हैं कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं और आरोपों की प्रकृति गंभीर है। अदालत ने कहा, "गवाहों के बयानों के अलावा, ऐसी सामग्रियां भी मौजूद हैं जो प्रथम दृष्टया बताती हैं कि अपराध करने में याचिकाकर्ता की सक्रिय भूमिका थी।"जमानत देने से इनकार करते हुए अदालत ने टिप्पणी की, "सभी संदिग्ध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। विभिन्न ऑडियो क्लिप से संदिग्धों के बीच हुई बातचीत का पता चलता है। पीएफआई का सक्रिय सदस्य होने के नाते, आवेदक मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को उकसाकर पूरे भारत में इसके राष्ट्रविरोधी और आतंकवादी उद्देश्यों को आगे बढ़ाने वाली गतिविधियों में लगा हुआ था।"अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि साक्ष्यों से पता चलता है कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन के एजेंडे को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा था, जिससे देश भर में सांप्रदायिक उकसावे के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया था।

एनआईए की दलीलों के अनुसार, जांच के दौरान बरामद डिजिटल साक्ष्य आरोपी के खिलाफ सामग्री का एक मुख्य हिस्सा हैं। एजेंसी ने पहले भी पीएफआई की व्यापक जांच में जब्त किए गए मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त सूचनाओं को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है।

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