भुवनेश्वर , जनवरी 30 -- ओडिशा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के जरिए खनन का निर्देश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि इससे पट्टे पर पर दी गई खदानों के कम इस्तेमाल से राज्य के खजाने को हो रहे राजस्व के नुकसान की भरपाई संभव होगी।

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एमएस रमन की खंडपीठ ने सिटीजन्स एक्शन फोरम, भुवनेश्वर द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए गुरुवार को एक आदेश में इस संबंध में निर्देश जारी किये।

खंडपीठ ने अपने आदेश में फैसला सुनाते हुए कहा, "हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि वह रियायत नियम, 2016 के नियम 12 (1) के तहत दिए गए नियमों को लागू करे ताकि राष्ट्रीय खनिज विकास निगम के जरिए खदानों का सबसे अच्छा इस्तेमाल सुनिश्चत करने के लिए कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा किया जा सके, जिसका मालिकाना हक और नियंत्रण केंद्र सरकार के पास है।

इस निर्देश से न सिर्फ खदानों का सबसे अच्छा इस्तेमाल सुनिश्चत होगा बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी खत्म होगा।"याचिका में कहा गया है कि खनन पट्टाधारी ने लीज पर मिली इन खदानों में लगातार खनन गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया जबकि खान एवं खनिज (विकास और नियमन) अधिनियम और रियायत नियम, 2016 के तहत उन पर जनता के हित में सबसे बेहतर इस्तेमाल की कानूनी जिम्मेदारी डाली गयी थी।

इसमें कुछ माइनिंग ब्लॉक्स पर भी जोर दिया गया ताकि यह साबित हो सके कि न सिर्फ एक साल में बल्कि लगातार कई सालों तक कम इस्तेमाल हुआ, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा।

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