श्रीनगर , दिसंबर 26 -- जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा कि न्यायपालिका ने बढ़ते विचाराधीन कैदियों का खुद से संज्ञान क्यों नहीं लिया है।

उन्होंने कहा कि हजारों कैदी बिना किसी सज़ा के सालों से जेलों में पड़े हैं।

सुश्री महबूबा की एक जनहित याचिका दो दिन पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायलय की एक खंडपीठ खारिज कर दी थी, जिसमें प्रदेश के मामलों को बाहरी जेलों से वापस केन्द्र शासित की जेलों में स्थानांतरित करने की मांग की गयी थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिका अस्पष्ट, बिना सबूतों वाली और राजनीतिक मकसद से प्रेरित थी और कानूनी मानकों को पूरा करने में विफल रही।

पूर्व मुख्यमंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 से बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों, खासकर जम्मू -कश्मीर के बाहर की जेलों में, ने परिवारों को बहुत दुख पहुंचाया है।

उन्होंने कहा, " अदालत यह क्यों नहीं जानना चाहती कि विचाराधीन कैदी बिना किसी सज़ा के सालों से जेलों में क्यों सड़ रहे हैं।"उन्होंने कहा कि कई परेशान परिवारों ने उनसे संपर्क किया था, जिनमें बहनें, माता-पिता और बेटियां शामिल थीं, जिनमें से कई ने डर के मारे अपनी पहचान छिपाई। उन्होंने ऐसे परिवारों के मामलों का जिक्र किया जिनका इकलौता बेटा या भाई दूर की जेलों में बंद है, जिससे उनसे मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है।

उन्होंने कहा, " मैंने प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखा था, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री और गृह सचिव को भी पत्र लिखकर केंद्र शासित प्रदेश के बाहर बंद विचाराधीन कैदियों का विवरण मांगा था।

उन्होंने कहा, " कोई जवाब न मिलने पर, मैंने उच्च न्यायालय का रुख किया।"सुश्री महबूबा ने न्यायालय के हाल के फैसले को 'चौंकाने वाला' बताया और कहा कि इसने मुद्दे गंभीरता की जांच करने के बजाय यह सवाल उठाया कि एक राजनेता ने याचिका क्यों दायर की।

पीडीपी प्रमुख ने कहा, " राजनेता जमीनी हकीकत से जुड़े होते हैं। मुझे पता है कि लोग किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।"उन्होंने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्य न्यायाधीश के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि देश भर में लगभग 76 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं, जिनमें से कई गरीब पृष्ठभूमि के हैं।

उन्होंने कहा, " हमने इन परिवारों का दुख देखा है। हमें यह मुद्दा उठाने का अधिकार है और हम पीछे नहीं हटेंगे। "उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उम्मीद थी कि नयी सरकार बनने से इस संवेदनशील मानवीय मुद्दे को सुलझाने में मदद मिलेगी, लेकिन उन्होंने निराशा जतायी कि कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।

उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से यह भी आग्रह किया कि वह एक टीम बनायें, जो घाटी के बाहर की जेलों का दौरा करके वहां बंद कश्मीरी विचाराधीन कैदियों की संख्या, स्थिति और उनके साथ होने वाले बर्ताव का जायजा ले।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित