जौनपुर , दिसम्बर 28 -- भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडेय ने रविवार को कहा कि अपने नाम के ही समान, अटलजी एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय नेता, प्रखर राजनीतिज्ञ, नि:स्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता, सशक्त वक्ता, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और बहुआयामी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। अटलजी जनता की बातों को ध्यान से सुनते थे और उनकी आकाँक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करते थे उनके कार्य राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को दिखाते थे।

भारतीय जनता पार्टी ने भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में रविवार को अटल स्मृति सम्मेलन मल्हनी विधानसभा के सनबीम स्कूल कुल्लहनामऊ में जिलाध्यक्ष अजीत प्रजापति के अध्यक्षता में आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेन्द्र नाथ पांडेय एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में काशी क्षेत्र के महामंत्री एवं जौनपुर के जिला प्रभारी अशोक चौरसिया उपस्थित रहे।

डॉ पांडेय ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते थे, वाजपेयी जी राजनीति के क्षेत्र में चार दशकों तक सक्रिय रहे। वह लोकसभा में नौ बार और राज्य सभा में दो बार चुने गए जो अपने आप में ही एक कीर्तिमान है। उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण स्थायी समितियों के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने आजादी के बाद भारत की घरेलू और विदेश नीति को आकार देने में एक सक्रिय भूमिका निभाई। वाजपेयी जी अपने छात्र जीवन के दौरान पहली बार राष्ट्रवादी राजनीति में तब आये जब उन्होंने वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन जिसने ब्रिटिश उपनिवेशवाद का अंत किया, में भाग लिया।

विशिष्ट अतिथि अशोक चौरसिया ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई ने अपना कैरियर पत्रकार के रूप में शुरू किया था और 1951 में भारतीय जन संघ में शामिल होने के बाद उन्होंने पत्रकारिता छोड़ दी उन्होंने कई कवितायेँ भी लिखी जिसे समीक्षकों द्वारा सराहा गया उनका जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रहने वाले एक विनम्र स्कूल शिक्षक के परिवार में हुआ। निजी जीवन में प्राप्त सफलता उनके राजनीतिक कौशल और भारतीय लोकतंत्र की देन है। पिछले कई दशकों में वह एक ऐसे नेता के रूप में उभरे जो विश्व के प्रति उदारवादी सोच और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता को महत्व देते हैं।

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