दौसा , दिसंबर 20 -- राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे ने नया साहित्य और नयी संस्कृति की दृष्टि देना साहित्यकारों का नैतिक दायित्व बताते हुए कहा है कि आधुनिक साहित्यकारों की जिम्मेदारी है कि वे विकृत इतिहास को खोजकर उसमें सुधार करें।

श्री बागडे शनिवार को दौसा जिले के लालसोट में अशोक शर्मा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित साहित्यकार सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अच्छा साहित्य समाज में पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाता है और विद्रूपताओं को मिटाता है।

राज्यपाल ने कहा कि देश की आजादी से पहले विदेशियों ने हमारे देश का काफी झूठा इतिहास भी लिखा है, जिसे सुधारने की जरूरत है। उन्होंने इसे आधुनिक साहित्यकारों की जिम्मेदारी बताया और कहा कि वे ऐसे विकृत इतिहास को खोजे और सुधारे। उन्होंने कहा कि साहित्य को समाज का दर्पण कहा गया है, जो समाज को नई दिशा एवं सोच देता है। यह समाज को सोचने पर मजबूर करता है। उन्होंने साहित्य के भाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि साहित्य में सबका हित निहित होता है। इसका मूल तत्व सबका हित साधना है।

उन्होंने कबीर एवं रहीम के साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने साहित्य के माध्यम से समाज सुधारने का संदेश दिया, जो रूढ़ियों एवं बुराइयों का प्रतिकार करता है। उन्होंने मैथिली शरण गुप्त एवं वाल्मीकि की ओर से साहित्य के माध्यम से समाज को दिए योगदान का भी जिक्र किया। राज्यपाल ने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही पिछड़े, जनजाति एवं घुमंतू वर्ग के लोग बराबरी के स्तर पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में नयी शिक्षा नीति सबको आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश दुनिया में अग्रणी बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 29 देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया है। इससे स्पष्ट है कि भारत विश्व गुरु एवं विश्व का नेता है। उन्होंने इसमें साहित्यकारों से भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इससे पहले श्री बागडे ने अनुराग सेवा संस्थान के 31 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित 31 साहित्यकारों को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

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