चंडीगढ़ , दिसंबर 11 -- पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिलिटेड (पीएसपीसीएल) ने नवंबर के आखिरी सप्ताह में पंजाब राज्य विद्युत नियामक आयोग (पीएसईआरसी) के समक्ष 2026-27 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) के लिए याचिकाएं दायर कीं।
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, पिछले वर्षों के घाटे को ध्यान में रखते हुए, 2026-27 के दौरान 1713 करोड़ रुपये का सांकेतिक घाटा होगा। पीएसईआरसी एआरआर से कुछ व्यय कम करेगा, इसलिए अगले वित्तीय वर्ष में टैरिफ में कोई वृद्धि नहीं हो सकती है। राजस्व की आवश्यकता 52385 करोड़ रुपये है और मौजूदा टैरिफ के साथ आय 53850 करोड़ रुपये है, जिसका अर्थ है 1485 करोड़ रुपये का अधिशेष।
बिजली बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया है कि पिछले वर्ष नियामक आयोग ने 44395 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता को मंजूरी दी थी, लेकिन पीएसपीसीएल ने अब 47707 करोड़ रुपये का वास्तविक आंकड़ा प्रस्तुत किया है, जिसका मुख्य कारण राज्य के तापीय संयंत्रों से बिजली आपूर्ति में वृद्धि के कारण ईंधन की लागत में 3155 करोड़ रुपये से बढ़कर 3489 करोड़ रुपये की वृद्धि है।
एआरआर का प्रमुख घटक 34081 करोड़ रुपये की अनुमानित बिजली खरीद है। पिछले वर्ष स्वीकृत बिजली खरीद लागत 29605 करोड़ रुपये थी, जो पिछले वर्ष की बाढ़ के कारण अब बढ़कर 29607 करोड़ रुपये हो गयी है। बिजली खरीद में अनुमानित वृद्धि 4400 करोड़ रुपये से अधिक है। कर्मचारी लागत का अनुमान 7881 करोड़ रुपये लगाया गया है, जो पिछले वर्ष के 7071 करोड़ रुपये के अनुमान से 800 करोड़ रुपये अधिक है।
पीएसपीसीएल ने अनुमान लगाया है कि कुल बिजली सब्सिडी 22,250 करोड़ रुपये होगी, जिसमें से 11249 करोड़ रुपये कृषि क्षेत्र के लिए, 8253 करोड़ रुपये घरेलू क्षेत्र के लिए और घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली के रूप में तथा 2747 करोड़ रुपये औद्योगिक क्षेत्र के लिए मौजूदा टैरिफ और अनुमानित खपत के आधार पर निर्धारित किये गये हैं। सरकारी विभागों से बकाया राशि, बिजली चोरी और सब्सिडी के भुगतान में देरी एक गंभीर मामला है और इससे पीएसपीसीएल की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है।
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