नयी दिल्ली , दिसंबर 20 -- दिल्ली के स्वास्थ्य और परिवहन मंत्री डॉक्टर पंकज कुमार सिंह ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बेड़े में अबतक 3518 इलेक्ट्रिक बसों (ईवी) की तैनाती की गईं तथा अगले साल मार्च तक 5000 बसों को शामिल करने का लक्ष्य है और नवंबर 2026 तक सात ज़हर से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसों को बेड़े में शामिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

डॉक्टर पंकज ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमारी सरकार के लगातार पॉलिसी एक्शन और सख्त कार्रवाई से अब जमीनी स्तर पर असर साफ तौर पर दिखाई देने लगा हैं। राजधानी दिल्ली के जिन इलाकों में पहले प्रदूषण का स्तर लगातार बहुत ज्यादा बढ़ जाता था और इमरजेंसी जैसे हालत पैदा हो जाते थे, वहां हमारी सरकार के लगातार प्रयास से अब हालात सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं।"उन्होंने कहा कि परिवहन से होने वाले प्रदूषण का दिल्ली के कुल प्रदूषण में लगभग 20-25 फीसदी का योगदान अनुमानित है, इसलिए ग्रीन और क्लीन मोबिलिटी हमारी सरकार की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उनकी सरकार सामूहिक प्रयास के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने में बढ़ोतरी करने में जुटी है। पिछले साल जहां दिल्ली में लगभग 80 हजार ईवी पंजीकृत हुए थे, वहीं सरकार बनने के बाद फरवरी 2025 से लेकर अब तक 10 महीनों में एक लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों के पंजीकरण हो चुके हैं।

परिवहन मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान ईवी सब्सिडी लागू करने में खामियों के चलते ईवी अपनाने की गति राजधानी दिल्ली में बेहद धीमी हो गई थी। पिछली सरकार के कार्यकाल में ईवी खरीदने वालों के लिए के लिए सब्सिडी देने का वादा किया गया था, लेकिन समय पर नहीं दिया गया, जिससे ईवी खरीदने वाले लोगों का भरोसा टूटने लगा था। उन्होंने कहा , " मैं दिल्ली के लोगों को भरोसा देता हूं कि हमारी सरकार राजधानी के लिए और बेहतर और लोगों पर केंद्रित ईवी नीतियां ला रही है, जिससे इसके अपनाने की गति और तेज होगी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी भी बेहद मजबूत होगी।"उन्होंने कहा , "हमारी सरकार के पहल के चलते सार्वजनिक परिवहन में ईवी मोबिलिटी में तेजी आई है। सिर्फ यहीं नहीं, हमने दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में अबतक 3518 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया है। हमारा लक्ष्य है कि अगले साल मार्च तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़कर 5000 से ज्यादा और नवंबर 2026 तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या को बढ़ाकर 7000 से ज्यादा करने की है, जो सस्टेनेबल ग्रीन और क्लीन मोबिलिटी की तरफ एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा।"उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण करने के लिए नीतियों में सुधारों के साथ-साथ एन्फोर्समेंट का काम भी तेज कर दिया गया है। बीते तीन दिनों के सघन अभियान में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग की टीमों के जरिए 12,200 चालान जारी किए गए । सरकार ने पेट्रोल पंपों पर 24 घंटे प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी जांच व्यवस्था लागू किया है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के तहत लगातार जांच और वेरिफिकेशन सुनिश्चित करने के लिए डीटीसी के कर्मचारियों को दिल्ली पुलिस अधिकारियों के साथ तैनात किया गया है। इस एनफोर्समेंट प्रोटोकॉल के तहत ईंधन सिर्फ उन्हीं गाड़ियों को दिया जाता है, जिनके पास वैलिड पीयूसी प्रमाणपत्र होता है, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित हो रहा है। राजधानी दिल्ली के 15 बड़े एंट्री पॉइंट्स पर स्पेशल एनफोर्समेंट कैंपेन भी चलाए जा रहे हैं, जिससे प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ चालान में तेजी से बढ़ोतरी हुई और दिल्ली में पंजीकृत वाहनों के साथ बाहर की गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा , "दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते मैं दिल्ली के प्रत्येक नागरिक को भरोसा देना चाहता हूं कि स्वास्थ्य विभाग प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए अपनी तैयारी को और भी मजबूत किया है। इंटीग्रेटेड अप्रोच के तहत हेल्थ डिपार्टमेंट प्रत्येक नागरिक को वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों, खासकर अस्थमा और सांस लेने में दिक्कत जैसी सांस से जुड़ी बीमारियों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।"उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के सभी सरकारी अस्पतालों को जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को तैनात करने और प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए खास इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। ज्यादा प्रदूषण जैसे हालात पैदा होने से बचने के लिए सभी नागरिकों का समुचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए सरकारी अस्पतालों में तैयारियों को बढ़ाया गया है। दिल्ली वासियों के लिए उनकी सरकार ने जो सबसे अहम सुधार करने पर जोर दिया था वह दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना को लागू करना था। आयुष्मान भारत योजना दिल्ली में शुरू करने के बाद से अबतक इलाज के लिए 28 करोड़ से ज्यादा की रकम दी जा चुकी है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को जरूरी वित्तीय सहायता मिली है, जो पहले पैसों की कमी के चलते समय पर हेल्थकेयर की सुविधा का लाभ नहीं ले पाते थे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के जरिए हम प्राइमरी हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से मजबूत करने में जुटे हैं। फिलहाल दिल्ली में 238 आयुष्मान आरोग्य मंदिर चल रहे हैं और आगे आने वाले दो महीने में 200 से ज्यादा और नए आरोग्य मंदिर खोलने की योजना है। इन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 90 से ज्यादा डायग्नोस्टिक टेस्ट इन हाउस किए जाते हैं। लोगों को मुफ्त में दवाएं मिल रही हैं और लोगों को घरों के आसपास आसानी से बेहतर इलाज मिल रहा है, जिससे दिल्ली सरकार के बड़े अस्पतालों पर बोझ बेहद कम हो रहा है।

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