लखनऊ , दिसम्बर 19 -- समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के संगठनात्मक फैसलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह निर्णय योग्यता या अनुभव पर नहीं, बल्कि वर्चस्ववादी मानसिकता पर आधारित है। उन्होंने सवाल उठाया कि पांच बार के विधायक को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना और सात बार के सांसद को प्रदेश अध्यक्ष बनाना किस तर्क पर आधारित है।

शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सामान्य रूप से राजनीति और शासन व्यवस्था में यह माना जाता है कि सांसद का कद विधायक से बड़ा होता है, केंद्र की जिम्मेदारी राज्य से व्यापक होती है और केंद्र सरकार का मंत्री राज्य सरकार के मंत्री से ऊपर माना जाता है। ऐसे में भाजपा के हालिया फैसले किसी भी स्थापित राजनीतिक तर्क या लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के पास इस फैसले को सही ठहराने के लिए कोई ठोस तर्क नहीं है। इसके पीछे केवल यही सोच काम कर रही है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज से आने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी योग्य, अनुभवी और लोकप्रिय क्यों न हो, उसे एक तय सीमा से आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।

यादव ने कहा कि भाजपा ने पीडीए समाज को नीचा दिखाने और उसे हाशिए पर रखने के लिए यह नया तरीका अपनाया है। यह फैसला केवल एक व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि पूरे पीडीए समाज का अपमान है। भाजपा लगातार ऐसे संकेत दे रही है कि सत्ता और संगठन पर वर्चस्ववादी वर्ग का ही अधिकार रहेगा।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पीडीए समाज अब इस अपमान को और सहन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पीडीए समाज अपने सम्मान, अधिकार और हिस्सेदारी के लिए एकजुट होकर आगे आए। समाजवादी पार्टी पीडीए समाज की आवाज बनकर उनके स्वाभिमान की लड़ाई लड़ेगी।

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