सहारनपुर , मई 11 -- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चुनावी हार को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव को दी गई नसीहत के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व सांसद फजलुर्रहमान कुरैशी ने इमरान मसूद के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी से भाजपा को फायदा और विपक्ष को नुकसान होगा। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में कहा था कि ममता बनर्जी की हार से अखिलेश यादव को सबक लेने की जरूरत है और उत्तर प्रदेश में भाजपा का मुकाबला केवल कांग्रेस ही कर सकती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार इमरान मसूद और अखिलेश यादव के बीच लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान इमरान मसूद समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन सपा नेतृत्व ने उन्हें तथा उनके करीबी नेताओं नरेश सैनी और मसूद अख्तर को टिकट नहीं दिया था। पार्टी ने बेहट सीट से उमर अली खान और सहारनपुर ग्रामीण सीट से आशु मलिक को उम्मीदवार बनाया था और दोनों चुनाव जीतने में सफल रहे थे।

इसके बाद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी छोड़ दी और बसपा होते हुए कांग्रेस में शामिल हो गए। बाद में उन्होंने सहारनपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। वहीं,वर्ष 2019 में बसपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते पूर्व सांसद फजलुर्रहमान कुरैशी ने कहा कि इमरान मसूद के बयान और गतिविधियां विपक्षी एकता को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी से भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलेगा।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इमरान मसूद वर्तमान में सपा विधायक उमर अली खान और आशु मलिक की उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन होने की स्थिति में भी कांग्रेस अपने उम्मीदवार मैदान में उतार सकती है।

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