बैतूल , मार्च 16 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।
यहां उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित परीक्षा में ग्रामीण बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि कई बुजुर्ग शुरुआत में परीक्षा देने से हिचक रहे थे, लेकिन शिक्षकों की मेहनत, समझाइश और सहयोग के कारण वे परीक्षा केंद्र तक पहुंचे और आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी।
यह परीक्षा कल बैतूल जिले के ढोडवाड़ा स्कूल में आयोजित की गई थी। कार्यक्रम का उद्देश्य गांव के निरक्षर वयस्कों और बुजुर्गों को अक्षर ज्ञान से जोड़ना और उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए प्रेरित करना था। परीक्षा में शामिल होने के लिए गांव के कई बुजुर्गों को शिक्षकों ने व्यक्तिगत रूप से प्रेरित किया।
जानकारी के अनुसार, कई बुजुर्गों ने शुरुआत में परीक्षा में शामिल होने में संकोच जताया। जैसे ही इसकी जानकारी शिक्षकों को मिली, उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया और सुबह से ही गांव में घर-घर जाकर बुजुर्गों और उनके परिजनों को साक्षरता का महत्व समझाया। तेज धूप के बावजूद शिक्षक गांव के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे और लोगों को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।
शिक्षक मदनलाल डढोरे, राजू गंगारे, राजेंद्र कुमार बेले और अक्षर साथी बद्रीप्रसाद पवार ने इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल बुजुर्गों को समझाया बल्कि कई ऐसे लोगों तक भी पहुंचे जो खेतों में बने मकानों में रहते हैं। कुछ बुजुर्गों को शिक्षकों ने अपनी गाड़ी से परीक्षा केंद्र तक लाकर परीक्षा दिलाई। परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक वापस उनके घर भी छोड़ा गया।
इस साक्षरता परीक्षा की सबसे भावुक और प्रेरणादायक तस्वीर 90 वर्षीय ईठा बाई पंडाग्रे की रही। इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद उन्होंने साक्षर बनने की इच्छा जाहिर की और परीक्षा में भाग लिया। उनकी सीखने की लगन देखकर शिक्षक भी भावुक हो गए। परीक्षा के दौरान उनसे अक्षर ज्ञान और चित्र पहचान से जुड़े सरल प्रश्न पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ सही उत्तर दिया।
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