अमृतसर , मार्च 18 -- श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक के दुरुपयोग की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है और सिख समुदाय एवं युवाओं के लिए एक विशेष संदेश जारी किया है। जत्थेदार गड़गज्ज ने बुधवार को समुदाय को आगाह किया कि जब भी कोई आपत्तिजनक एआई-जनरेटेड वीडियो, फोटो या सामग्री सामने आये, तो उसे आगे साझा न करें। इसके बजाय, ऐसी सामग्री को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तुरंत 'आपत्तिजनक' के रूप में रिपोर्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अनजाने में ऐसी सामग्री को अपने सोशल मीडिया पर साझा या अपलोड कर देते हैं, जिससे शरारती तत्वों का मकसद पूरा होता है और धार्मिक भावनाएं और अधिक आहत होती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी सामग्री को प्रसारित करने के बजाय तुरंत रिपोर्ट करने से उसे हटवाने में मदद मिल सकती है।

जत्थेदार ने मीडिया संस्थानों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वेब चैनलों से भी संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी एआई-जनरेटेड सामग्री को डाउनलोड या रीपोस्ट करने से बचें, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती हो, क्योंकि ऐसा करने से नुकसान और बढ़ जाता है।

ज्ञानी गड़गज्ज ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में सख्ती से काम लेना चाहिए और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए खुद संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाने वाली एआई तकनीक के दुरुपयोग को रोकना सरकारों की जिम्मेदारी है। उन्होंने एक मजबूत एआई नीति बनाने का आह्वान किया ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी एआई टूल, सॉफ्टवेयर या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके धार्मिक विश्वासों के विरुद्ध कोई भी आपत्तिजनक सामग्री न बनाई जा सके और न ही अपलोड की जा सके। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी सामग्री को सार्वजनिक होने से पहले ही पहचान लिया जाए, तो समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि एआई तकनीक अपने आप में हानिकारक नहीं है और यदि इसका सही ढंग से उपयोग किया जाये, तो यह एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दे सकती है। हालांकि, जब इसका उपयोग धर्मों के सिद्धांतों, परंपराओं और इतिहास का उल्लंघन करने के लिए किया जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने सिख संगत को एक सामूहिक आंदोलन के रूप में आगे आने और ऐसी प्रथाओं को रोकने के लिए गंभीरता से सार्थक कदम उठाने का संदेश दिया।

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