चंडीगढ़ , दिसंबर 29 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोमवार को कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और अकाली दल को श्री अकाल तख़्त साहिब और पंथ को अपने कुकर्मों के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
श्री मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता हुए स्वरूपों के मामले में कोई कार्रवाई न होने से पूरी संगत नाराज़ है। शिरोमणि कमेटी इस पाप में शामिल अपने आकाओं के करीबी धनाढ्यों को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से पंजाबी और सिख समुदाय गहरे सदमे में है क्योंकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के लापता होने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि पंथक संगठनों और संत समाज ने लंबे समय से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है और इस उद्देश्य से राज्य सरकार तक भी पहुंच की है। मान ने कहा कि अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत राज्य सरकार ने इस संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज की है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज होते ही अपने आकाओं के निर्देशों पर शिरोमणि कमेटी ने प्रेस के माध्यम से जानकारी देना शुरू कर दी और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार के खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के मुखिया ने स्वीकार किया है कि कमेटी में रोज़ाना 10-12 घोटाले होते हैं, जो यह दर्शाता है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाये गये गोलक के धन का दुरुपयोग हो रहा है।
श्री मान ने कहा कि शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने वर्ष 2020 में अपनी बैठक में इस मामले में दोषी कर्मचारियों और प्रकाशकों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि इतनी अनियमितताओं के बावजूद इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि शिरोमणि कमेटी ने स्वयं पूर्व मुख्य सचिव डॉ रूप सिंह जैसे धनाढ्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि एस.एस. कोहली एंड एसोसिएट (चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म) की सभी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया था और जिम्मेदारियों में विफल रहने के कारण किए गए 75 प्रतिशत भुगतान की वसूली को भी मंजूरी दी गयी थी। श्री मान ने कहा कि चूंकि कोहली अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल के सी.ए. के रूप में भी सेवाएं दे रहा था, इसलिए कार्रवाई आज तक लंबित है।
श्री मान ने कहा कि अकाली शासन के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाशन के सभी अधिकार 'जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 (पंजाब एक्ट)' के माध्यम से शिरोमणि कमेटी को दिये गये थे, लेकिन अब जब राज्य सरकार इन स्वरूपों की बरामदगी सुनिश्चित करना चाहती है, ताकि किसी भी प्रकार की बेअदबी या अन्य घिनौना अपराध न हो, तो ये लोग इसे धार्मिक रंग दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिरोमणि कमेटी हर तरह की ताकत चाहती है, लेकिन जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनना चाहती। उन्होंने कहा कि अब वे श्री अकाल तख़्त साहिब का इस्तेमाल अपने आकाओं के नज़दीकियों को बचाने के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं।
श्री मान ने कहा कि भले ही शिरोमणि कमेटी लापता स्वरूपों को ढूंढने में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही है, लेकिन राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस घिनौने अपराध के दोषियों को कानून के अनुसार सज़ा दी जाये। उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से इस प्रतिष्ठित संस्था के चुनाव नहीं हुए हैं और इन नेताओं ने केंद्र सरकार से इसकी मांग तक नहीं की है।
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