मुंबई , जनवरी 18 -- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अंबरनाथ विकास अघाड़ी (एवीए) की मान्यता रद्द करने के तथा नगर परिषद चुनाव में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के गठबंधन को पूर्व-चुनावी गठबंधन के रूप में मान्यता देने संबंधी फैसलों पर सोमवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति अभय जे. मंत्री की पीठ ने अंबरनाथ नगर परिषद के राकांपा सदस्यों के पाला बदलने को 'ग्लोब-ट्रॉटिंग' करार देते हुए ठाणे जिला कलेक्टर को प्रतिद्वंद्वी गुटों की दलीलों पर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया। पीठ ने सुनवाई के दौरान परिषद में जनस्वास्थ्य, लोक निर्माण और शिक्षा सहित विभिन्न विषय समितियों के गठन के लिये प्रस्तावित बैठक को 19 जनवरी की शाम तक के लिये अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया।
उल्लेखनीय है कि ठाणे जिले का पड़ोसी अंबरनाथ उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी राज्य की सत्तारूढ़ सहयोगी शिवसेना को नगर परिषद की सत्ता से बाहर रखने के लिये कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था।
भाजपा ने प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से नगर परिषद अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की, लेकिन 60 सदस्यीय परिषद में 27 सीटों के साथ शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। इसके बाद भाजपा (14), कांग्रेस (12), राकांपा (4) और निर्दलीय (2) रहे। कोई भी दल अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सका।
प्रारंभ में 14 भाजपा, 12 कांग्रेस, 4 राकांपा और एक निर्दलीय सदस्य को मिलाकर गठित अंबरनाथ विकास अघाड़ी ने उपाध्यक्ष पद के लिये भाजपा के अभिजीत गुलाबराव करंजुले-पाटिल को गुट नेता घोषित करते हुए ठाणे कलेक्टर को पत्र सौंपा था। कलेक्टर ने सात जनवरी को एवीए को पूर्व-चुनावी गठबंधन के रूप में मान्यता दी थी।
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