रांची , मार्च 08 -- झारखंड में प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है।

घर दलहीज से निकलकर राज्य में कई अहम पदों पर महिला अधिकारी जिम्मेदारी संभाल रही हैं और अपनी कार्यशैली से यह साबित कर रही हैं कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी वे प्रभावी नेतृत्व देने में पूरी तरह सक्षम हैं। आज झारखंड में न केवल जिलों के प्रशासनिक पदों पर बल्कि पुलिस और गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं।

झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना डाडेल (आईएएस) महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। गृह विभाग राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, जेल प्रबंधन और आपदा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस विभाग की कमान संभालना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है।

वहीं झारखंड पुलिस की कमान डीजीपी तदाशा मिश्रा के हाथों में है। राज्य के सर्वोच्च पुलिस पद पर एक महिला अधिकारी की नियुक्ति महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का बड़ा उदाहरण मानी जाती है। डीजीपी के रूप में उनकी जिम्मेदारी पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था को बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस प्रशासन का संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। उनके नेतृत्व में झारखंड पुलिस अपराध नियंत्रण, साइबर क्राइम की निगरानी, महिला सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रही है।

महिला दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि जब महिलाएं सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है।

झारखंड के कई जिलों में महिला आईएएस अधिकारी उपायुक्त के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं। खूंटी में आर. रोनिता (आईएएस), गोड्डा में अंजलि यादव (आईएएस), सिमडेगा में कंचन सिंह (आईएएस), गुमला में प्रेरणा दीक्षित (आईएएस), चतरा में कीर्तिश्री जी (आईएएस) और पलामू में समीरा एस (आईएएस) उपायुक्त के रूप में कार्यरत हैं। ये अधिकारी जिलों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इसी तरह राज्य के कुछ जिलों में महिला आईपीएस अधिकारी भी पुलिस अधीक्षक के रूप में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रही हैं। पलामू में रिष्मा रमेशन (आईपीएस) और पाकुड़ में निधि द्विवेदी (आईपीएस) पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं और अपराध नियंत्रण तथा पुलिस व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। महिला एसपी के रूप में उनकी कार्यशैली को संवेदनशील और सख्त दोनों माना जाता है, खासकर महिला संबंधित अपराधों की सुनवाई में उनकी सक्रियता की सराहना की जाती है।

झारखंड में महिलाओं की बढ़ती प्रशासनिक भागीदारी केवल पदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में एक नई सोच को भी दर्शाती है।

महिला अधिकारी अक्सर जन समस्याओं को संवेदनशील दृष्टिकोण से समझती हैं और सामाजिक योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में विशेष रुचि लेती हैं। महिला दिवस के अवसर पर यह कहा जा सकता है कि झारखंड में महिलाएं अब केवल समाज के एक हिस्से के रूप में नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका में भी मजबूती से आगे बढ़ रही हैं। प्रशासन, पुलिस और नीति निर्धारण जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भागीदारी राज्य में बेहतर शासन और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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