पोर्ट ब्लेयर/नयी दिल्ली , दिसंबर 12 -- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि अंडमान-निकोबार केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की तपोभूमि है।

श्री शाह ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में आयोजित समारोह में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की आदमकद प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर यह बात कही। इस अवसर पर श्री शाह के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी मौजूद थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में श्री शाह ने कहा कि वीर सावरकर का जीवन मातृभूमि के प्रति निष्ठा, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है और यह वीर सावरकर प्रेरणा पार्क आने वाली पीढ़ियों को उसी भावना से प्रेरित करेगा।

श्री शाह ने अपने संबोधन में सेल्युलर जेल (काला पानी) का उल्लेख करते हुए कहा कि आज़ादी से पहले यहां भेजे गए कैदी के लौटने की प्रतीक्षा कोई नहीं करता था। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले जिसे काला पानी की सजा मिलती थी, उसके जिंदा वापस आने की कोई कल्पना नहीं करता था। यदि कोई लौट भी आए, तो वह शरीर, मन और आत्मा से इतनी यातना से गुजर चुके होते थे कि वह पहले जैसा कभी नहीं रह पाता था। उन्होंने कहा कि आज यही स्थान भारतवासियों के लिए तीर्थ स्थल है, क्योंकि यहीं वीर सावरकर ने अपने जीवन का सबसे कठिन समय बिताया था।

श्री शाह ने कहा कि यह द्वीप समूह केवल सावरकर नहीं, बल्कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्मृतियों से भी गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि आज़ाद हिंद फौज द्वारा मुक्त कराई गई भारत की पहली भूमि अंडमान-निकोबार ही थी। उन्होंने यह भी बताया कि नेताजी यहां दो दिन रहे थे और उन्होंने ही इन द्वीपों को 'शहीद' और 'स्वराज' नाम देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यवहार में लाया।

श्री शाह ने अपने भाषण में कहा कि अंडमान-निकोबार केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि "देश के लगभग हर प्रांत के स्वतंत्रता सेनानियों की तपोभूमि" है। उन्होंने बताया कि दो प्रांतों को छोड़कर शेष सभी प्रांतों के किसी न किसी क्रांतिकारी को यहां फांसी दी गई थी और अनेक योद्धाओं ने इस भूमि पर अपने प्राण न्योछावर किए।

सावरकर की प्रतिमा के महत्व पर श्री शाह ने कहा कि यह प्रतिमा कई दशकों तक सावरकर के बलिदान, संकल्प और अखंड राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहेगी। यह स्थान युवाओं को राष्ट्र के प्रति समर्पण और कर्तव्यबोध का संदेश देता रहेगा। उन्होंने कहा कि सागर की तरह विराट और अनंत व्यक्तित्व वाले सावरकर को किसी एक माध्यम-चाहे वह पुस्तक हो, कविता या फिल्म-में समेटना कठिन है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे प्रयासों ने युवाओं के लिए सावरकर को समझने के नए मार्ग खोले हैं।

श्री शाह ने कहा कि वीर सावरकर प्रेरणा पार्क भविष्य में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों को संजोने वाला प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पार्क और प्रतिमा राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करेंगे।

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