नयी दिल्ली , जनवरी 19 -- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने आज बताया कि डॉ. सिंह ने श्री विजयपुरम में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र का दौरा करने के बाद कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह "जैव विविधता की एक जीवंत प्रयोगशाला" है, जहां अत्याधुनिक विज्ञान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जेडएसआई जैसे संस्थान प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और महासागर आधारित आर्थिक विकास पर राष्ट्रीय नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं।
डॉ. सिंह ने द्वीपसमूह के प्रमुख पर्यटन और शैक्षिक स्थलों में से एक जेडएसआई संग्रहालय का भी दौरा किया जिसमें 22 जीव-जंतु समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 3,500 नमूने रखे गए हैं। उन्हें जन-जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में संग्रहालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई, जहां छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों सहित प्रतिवर्ष 75,000 से 1,00,000 आगंतुक आते हैं। डॉ. सिंह ने द्वीपसमूह के स्थानिक, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त जीव-जंतुओं को प्रदर्शित करने वाले संदर्भ संग्रह, नमूनों और प्रदर्शनियों में गहरी रुचि दिखाई।
केंद्रीय मंत्री को पोर्ट ब्लेयर स्थित जेडएसआई की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई जो भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआरआई) का नोडल केंद्र है। इसका उद्देश्य भारतीय जलक्षेत्र में प्रवाल भित्ति अनुसंधान और निगरानी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशिष्ट संस्थान नाजुक समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित समुद्री शासन को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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