ऋषिकेश , मई 01 -- उत्तराखंड में ऋषिकेश अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंगदान की एक प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है, जहां सड़क दुर्घटना में घायल 23 वर्षीय युवती ने मौत के बाद तीन लोगों को नई जिंदगी दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार युवती को 21 अप्रैल को सड़क हादसे के बाद गंभीर अवस्था में एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद गत गुरुवार को उसे 'ब्रेन डेड' घोषित कर दिया गया।
इसके बाद चिकित्सकों की सलाह पर युवती के परिजनों ने शुक्रवार को साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान की अनुमति दे दी। इस मानवीय कदम से दो मरीजों को किडनी और एक मरीज को लीवर प्रत्यारोपण के जरिए नया जीवन मिल सका।
एम्स ऋषिकेश में यह पहला अवसर रहा जब लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। इसके साथ ही संस्थान में किडनी प्रत्यारोपण की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए एक और उपलब्धि हासिल की गई। चिकित्सकों की टीम ने कल रात करीब नौ बजे ऑपरेशन शुरू किया, जो लगातार 13 घंटे तक चला और आज सुबह सफलतापूर्वक पूरा हुआ। अंगदान प्रक्रिया के तहत एक किडनी और पेनक्रियाज को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली भेजा गया, जहां उनका प्रत्यारोपण किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन की मदद से जरूरतमंद मरीजों का चयन कर अंगों का आवंटन किया गया। इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ देश के वरिष्ठ विशेषज्ञ भी शामिल रहे। सभी ने समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सफल बनाया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) मीनू सिंह ने बताया कि यह उपलब्धि एम्स ऋषिकेश के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी संस्थान अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करता रहेगा और लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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