पटना , जनवरी 21 -- स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन(सोटो) के चेयरमैन डॉ. मनीष मंडल ने बुधवार को कहा कि अंगदान करना सभी दानों से बड़ा पुण्य है और इसके लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए उनकी संस्था लगातार प्रयास कर रही है।
डॉ. मंडल ने कहा कि अंगदान से किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन दान देने के सामान है और ऐसा करते ही मरने वाला व्यक्ति ख़ुद को किसी और के शरीर में माध्यम से ज़िंदा भी रख सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मरीजों की समस्याएं बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए अंगदान के लिए लोगों को प्रेरित करना आवश्यक है।
सोटो ने आज बेली रोड स्थित केंद्रीय विद्यालय नंबर 2 के परिसर में अंगदान विषय पर अवेयरनेस कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय की सह प्राचार्य के स्वागत भाषण से हुई, जिसके बाद सोटो के चेयरमैन डॉ. मंडल ने अंगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की ।
डॉ. मंडल ने वहाँ उपस्थित सभी शिक्षक, छात्राओं को अंगदान से जुड़ी जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार से और लोगों में जागरूकता लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में दान करने वालो की संख्या अभी बहुत कम है, लेकिन कुछ राज्यों में जागरूकता पहले से ज्यादा बढ़ी है । उन्होंने कहा कि जागरूकता के प्रयासों के बाद बिहार में भी अंग दान करने के लिए आगे आने वालों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि भविष्य में ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस मुहिम से जुड़ेंगे और अंगदान कि लिए आगे आयेंगे।
केंद्रीय विद्यालय नंबर दो के प्राचार्य एम.के सिंह ने कहा उनका विद्यालय अंगदान जैसे महत्वपूर्ण विषय पर हो रहे इस कार्यक्रम से गौरवान्वित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की मांग बढ़ी है और इससे लेकर जानकारी का अभाव भी है। उन्होंने कहा कि इसके विस्तार के लिए लोगों का शिक्षित होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज के ज़रिए भावी पीढ़ी को इस सकारात्मक संदेश के लिए तैयार करना एक जरूरी पहल है।
इस कार्यक्रम के दौरान नोडल ऑफिसर डॉ. मनोज कुमार ने अंगदान से जुड़ी तमाम बारीकियों को साझा करते हुए जीवित व्यक्ति, जिसका ब्रेन डेड हो, उसके अंगदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि "अलग अलग अंगों के प्रत्यारोपण के लिए अलग अलग समय अवधि होती है, इसलिए अंगदान का निर्णय समय रहते लेना होता है। इसलिए इससे जुड़ी जानकारी पहले से हो तभी सही समय पर अंगदान हो सकता है।
सोटो की आई कंसलटेंट एकता ने अंगदान से जुड़े मिथक कि बारे में कहा कि आमतौर पर लोग अंगदान के बारे में चर्चा से भी डरते हैं। उन्हें लगता है कि अंगदान का निर्णय लिया तो डॉक्टर मरीज की जान बचाने की कोशिश नहीं करेंगे। कइयों को यह भी लगता है कि अंगदान किया तो हम अगले जन्म में उन अंगों के बिना ही जन्म लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मिथक को तोड़ने की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम में सौ से भी ज़्यादा शिक्षक शिक्षिकाएं एवं छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित