देहरादून, फरवरी 08 -- अंकिता मामले मे वीआईपी को सजा दिलवाने और सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग को लेकर रविवार को अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने देहरादून के परेड ग्राउंड के निकट महापंचायत आयोजित की।
जिसमें कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के घटक दलों, राज्य आंदोलनकारियों, सामाजिक और जन संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में जुटे। इस महापंचायत में अंकिता के माता-पिता और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी पहुंचे।
महापंचायत में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर सत्यनारायण सचान ने वहां मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अंकिता मामले की सीबीआई जांच एक पर्यावरणविद की तहरीर को आधार बनाकर करवा रहे हैं।
जबकि सीबीआई जांच उस व्यक्ति की तहरीर के आधार पर नहीं बल्कि अंकिता के माता-पिता की तहरीर के आधार पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए। डॉ सचान ने कहा कि जिन लोगों ने साक्ष्य मिटाने का काम किया उन लोगों को भी सीबीआई जांच की परिधि में लाया जाए।
जिन्होंने अंकिता केस में थाने पर एफआईआर दर्ज करवाई है, उनका कोई भी संबंध अंकिता के परिवार से नहीं है, और ना तो वह किसी आंदोलन में नजर आए। इसलिए उनकी जांच भी होनी आवश्यक है।
भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि आखिरकार अंकिता भंडारी प्रकरण में सरकार ने सड़कों के आंदोलनों के दबाव में आकर सीबीआई जांच कराए जाने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि अब 3 साल बाद इस मामले में विलंबित जांच की जा रही है। इंद्रेश मैखुरी का कहना है कि महापंचायत में सभी ने एक स्वर मे अंकिता हत्याकांड की जांच सीबीआई से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराये जाने की मांग उठाई है।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के सदस्य मोहित डिमरी का कहना है कि अंकिता प्रकरण में प्रदेश की धामी सरकार विआईपी को बचाने का काम कर रही है। सीबीआई जांच में की गई चालाकी इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है, जिसमें पर्यावरणविद अनिल जोशी की शिकायत पर जांच हो रही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित