नई दिल्ली, फरवरी 3 -- लोकप्रिय मेसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने 'take it or leave it' नीति को लेकर WhatsApp और उसकी पेरेंट कंपनी Meta पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट की नाराजगी की वजह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि यह सवाल है कि क्या कोई टेक कंपनी करोड़ों यूजर्स को अपनी शर्तें जबरन मानने के लिए मजबूर कर सकती है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि WhatsApp यूजर्स को बिना विकल्प दिए नई प्राइवेसी पॉलिसी एक्सेप्ट करने के लिए फोर्स कर रहा है। कोर्ट के मुताबिक, या तो यूजर शर्तें मान ले या फिर प्लेटफॉर्म छोड़ दे। यह तरीका ना तो निष्पक्ष है और ना ही यूजर्स के मौलिक अधिकारों से मेल खाता है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि सहमति (consent) तभी वैध मानी जा सकती है, जब वह इंडिपें...