नई दिल्ली, फरवरी 13 -- SC/ST Act की धारा 3(1)(r) के तहत अनुसूचित जाति के सदस्य के हर अपमान को अत्याचार नहीं माना जा सकता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक सार्वजनिक रूप से धमकी या अपमान नहीं किया गया हो, तब तक मतभेद, प्रशासनिक विवाद या कार्यस्थल पर कथित तौर पर अपमान इस एक्ट के तहत अपराध नहीं हो जाता है।क्या था मामला लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में याचिकाकर्ता संस्कृत में बीए, एमए और पीएचडी कर चुकी हैं। वह संस्कृत कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी में विभाग प्रमुख हैं। वहीं, शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से हैं और असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर ने याचिकाकर्ता पर जलन रखने और परेशान करने के आरोप लगाए थे। उनका आरोप थे कि विभाग प्रमुख उन्हें विभाग के फैसलों में शामिल नहीं करतीं, क्लासेज रोक दीं, एग्जाम ड्यूटी नहीं करने दी और ऑनलाइन म...