नई दिल्ली, फरवरी 4 -- स्वामी परमहंस योगानंद जी एक आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने क्रिया योग को जन-जन तक पहुंचाया। उनकी लिखी किताब 'एक योगी की आत्मकथा' दुनियाभर में आज भी लोकप्रिय है। उन्होंने अपने विचारों से आत्मा, मन और शरीर के संतुलन को समझाने और लोगों तक पहुंचाने का काम किया। उनका मानना था कि हमारे शरीर और मन के बीच गहरा संबंध है। आपके शरीर की स्थिति केवल बाहरी कारणों से तय नहीं होती बल्कि आपके मन में चल रहे विचार भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। कुल मिलाकर कहें तो मन ही शरीर को संचालित करने वाली शक्ति है। आज के सुविचार में भी परमहंस योगानंद जी यही बात कहते हैं।आज का सुविचार (In English) Never allow your mind to entertain thoughts of illness or limitation; you will see your body change for the better. Remember that mind Is the power tha...
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