भोपाल, फरवरी 7 -- मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कई सालों से चले आ रहे पति-पत्नी के बीच के विवाद को खत्म करने के लिए कोर्ट ने बच्ची के डीएनए टेस्ट फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट का कहना है कि डीएनए टेस्ट का उद्देश्य बच्ची की वैधता पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि पति द्वारा लगाए गए व्यभिचार के आरोपों की सच्चाई जानना है। इस मामले में न्यायमूर्ति विवेक जैन ने 20 जनवरी को पत्नी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैमिली कोर्ट का आदेश उचित और कानूनी रूप से सही है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पत्नी डीएनए सैंपल देने से मना करती है, तो फैमिली कोर्ट उसके खिलाफ भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत प्रतिकूल अनुमान लगा सकता है।क्या है पति का आरोप अदालत ने अपने फैसले में मानवीय पहलू पर भी जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला बच्चे को अवैध ठहराने या ...