नई दिल्ली, फरवरी 14 -- होली रंगों का त्योहार है, लेकिन काशी में एक होली ऐसी भी है जो रंगों से नहीं, बल्कि चिता की राख से खेली जाती है। इसे मसान की होली, भस्म होली या भभूत होली कहा जाता है। यह त्योहार वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा का अनोखा हिस्सा है। 2026 में मसान की होली 28 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान महाश्मशानाथ अर्थात भोलेनाथ अपने गणों - भूत, प्रेत, पिशाच, यक्ष, गंधर्व और राक्षसों के साथ राख से होली खेलते हैं। शिवपुराण और दुर्गा सप्तशती में इसकी झलक मिलती है। यह उत्सव जीवन की क्षणभंगुरता, मोह-माया से मुक्ति और मृत्यु पर विजय का प्रतीक है।मसान होली का धार्मिक महत्व मसान की होली मोक्ष और वैराग्य का संदेश देती है। यह हमें याद दिलाती है कि अंत में सब कुछ राख हो जाता है। रंगों की होली जहां सांसारिक आनंद का प्रतीक है, वहीं मसान की होली आ...