महाराजगंज, मई 8 -- महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। 1971 जंग में नौतनवा के 10 सैनिक शामिल हुए थे। युद्ध में कुछ साथियों के खो देने का गम भी उन्हें हैं। लेकिन जज्बा आज भी उतना ही है। जब वह पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाते हुए उनके घर में घुसकर घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। कुछ सैनिकों की मृत्यु भी हो चुकी है। कुछ आज भी देश के लिए कुर्बान होने का जज्बा रखते हैं। 1971 की जंग लड़ चुके पूर्व सैनिक कस्बे के विभिन्न मोहल्ले में अपने परिवार के साथ आज भी निवास करते हैं। गोलियों की तड़ तड़ाहट और ग्रेनाइट से हमले की गूंज आज भी उन्हें जंग की याद दिला देती है। जंग के उस दौर को याद कर आज भी पूर्व सैनिकों की आंखें नाम हो जाती हैं। देश की अलग-अलग सीमाओं पर तैनात बटालियन को युद्ध शुरू होते ही बांग्लादेश की सीमा पर भेजा गया था। कस्बे के रहने वाले पूर्व सैनिक तू...
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