लखनऊ, सितम्बर 5 -- लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। मोटापे की वजह से 70 प्रतिशत मरीजों को घुटनों की परेशानी हो रही है। घुटनों को आपस में रगड़ने से बचाने में अहम कॉटिलेज खराब होता है, जबकि 30 प्रतिशत घुटनों की समस्याएं आनुवंशिक कारणों से होती है। यह जानकारी उप्र आर्थराइटिस फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. संदीप कपूर ने दी। डॉ. संदीप कपूर ने बताया कि घुटनों में घिसाव के कारण मरीज को दर्द होता है। काफी मरीजों को घुटना प्रत्यारोपण तक की जरूरत पड़ती है। 40 वर्ष की आयु के आसपास के युवाओं में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। इनमें घुटने का कुछ भाग ही प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। कम उम्र में प्रत्यारोपण के अपने दुष्प्रभाव है। 15 से 20 साल के बाद मरीज को पुनरीक्षण सर्जरी करानी पड़ती है। डॉ. संदीप गर्ग ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी से मरीजों का इलाज आसान हो गया है।...
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