नई दिल्ली, फरवरी 3 -- एक दंपति के लिए माता-पिता बनने का सफर आसान नहीं रहा। आठ सालों तक बच्चे की उम्मीद में वे अलग-अलग अस्पतालों और इलाजों के बीच भटकते रहे। छह बार आईवीएफ कराया गया, लेकिन हर बार नतीजा निराशाजनक रहा। हर कोशिश एक फोन कॉल पर खत्म होती थी और उम्मीदें फिर टूट जाती थीं। दंपति के मुताबिक, इस बार इलाज का तरीका बदला गया। बिना जल्दबाजी किए डॉक्टरों ने पुराने सभी मेडिकल रिकॉर्ड दोबारा देखे। दवाओं की प्रतिक्रिया, भ्रूण का विकास, ट्रांसफर का समय और पिछली असफलताओं के संभावित कारणों का विश्लेषण किया गया। इसके बाद महिला की शारीरिक स्थिति के अनुसार एक व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की गई। इस सर्दी में आईवीएफ सेंटर में फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. निशी सिंह की देखरेख में किए गए इलाज के बाद दंपति के जीवन में वह पल आया, जिसका वे सालों से इंतजार कर रहे...