लखनऊ, दिसम्बर 5 -- प्रदेश में अब तक 53 लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 57,631 मीटर कभी नेटवर्क के दायरे में आए ही नहीं। यही नहीं, 1,237 मीटर ऐसे हैं, जो बाईपास हो गए। यानी, जिन उपभोक्ताओं के यहां ये स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगे हैं, वे बिजली चोरी कर रहे हैं। यह तब है जब पावर कॉरपोरेशन ने दावा किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बाद बिजली चोरी नहीं हो सकेगी। स्मार्ट प्रीपेड मीटर 4जी तकनीक या रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीक (आरएफ) तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसमें सिम लगाया गया है। इसी सिम से सभी विद्युत उपभोक्ताओं के मीटर से जुड़ी सभी सूचनाएं बिजली कंपनियों के मीटर डेटा मैनेजमेंट (एमडीएम ) पर आती है। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उपभोक्ताओं को बिजली बिल के लोड, खपत और खाते में बची रकम की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। प्रदेश में ल...