शाहजहांपुर, फरवरी 21 -- इस वर्ष 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा। इसके साथ ही होली से पूर्व आठ दिनों का होलाष्टक 24 फरवरी, मंगलवार से प्रारंभ हो जाएगा। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा तक के इन आठ दिनों में मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक की परंपरा मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक कष्ट दिए थे और अंतिम दिन होलिका के साथ उसे अग्नि में बैठाकर जलाने का प्रयास किया था। इसी कारण इन दिनों को अशुभ माना जाता है और लोग अधिक से अधिक समय पूजा-पाठ, जप-तप और भक्ति में लगाते हैं। श्री रुद्र बाला जी धाम के पं. डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल के अनुसार होलाष्टक की मान्यता मुख्य रूप से पंजाब और उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में अधिक प्रभावी म...