दरभंगा, सितम्बर 27 -- दरभंगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कम्प्यूटेशनल प्रणालियों की वह क्षमता है जो आम तौर पर मानवीय बुद्धिमत्ता से जुड़े कार्यों को करने में सक्षम होती है। इसकी स्थापना 1956 में एक अकादमिक अनुशासन के रूप में हुई थी और यह क्षेत्र अपनी प्रगति यात्रा में आशावाद के कई चक्रों से गुजरा है। यह बात लनामिवि के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने शुक्रवार को सीएम साइंस कॉलेज में पीजी भौतिकी विभाग की ओर से 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: रिसेंट ट्रेंड्स एंड फ्यूचर इंप्लीकेशंस विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ करते हुए कही। उन्होंने कहा कि 2020 के दशक में उन्नत जनरेटिव एआई ने तेजी से प्रगति की। इसकी सामग्री बनाने और इसे संशोधित करने की क्षमता ने कई अनपेक्षित सफलताएं हासिल की, लेकिन इसने इसके साथ ही कई नुकसानों को भी जन्म दिया। सं...
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