मुंगेर, जनवरी 15 -- मुंगेर, सुजीत मिश्रा/हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। 15 जनवरी 1934। दोपहर का वक्त था। अचानक धरती कांप उठी। कुछ ही पलों में हंसता-बसता शहर मलबे के ढेर में बदल गया। यह वही दिन था, जब इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंपों में से एक ने मुंगेर को नेस्तनाबूद कर दिया। गुरुवार को इसी त्रासदी के 92 वर्ष पूरे हो रहे हैं। रिक्टर पैमाने पर 8.03 तीव्रता वाले इस भूकंप में करीब 1500 लोगों की जान चली गई थी। हजारों मकान जमींदोज हो गए थे। उपजाऊ खेतों में दरारें पड़ गईं और बालू निकल आए। हर तरफ चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल था। दो मिनट में उजड़ गया शहर: इतिहासकार डॉ. ए.एस. कोल्सन के अनुसार, भूकंप 15 जनवरी 1934 को दोपहर 2 बजकर 13 मिनट 22 सेकेंड पर आया। धरती करीब दो से तीन मिनट तक लगातार डोलती रही। जमीन के नीचे से गड़गड़ाहट की आवाजें आ रही थीं। धूल के गुबार...
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