नई दिल्ली, जून 2 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। तीस हजारी अदालत ने 17 वर्ष पुराने एक वाणिज्यिक विवाद का निपटारा कर दिया। अदालत ने कहा कि वाणिज्यिक मामलों के निर्णय में इस तरह की देरी हितधारकों के विश्वास को कम करती है। जिला न्यायाधीश मोनिका सरोहा की अदालत वर्ष 2008 के अप्रैल माह में एक कंपनी की ओर से जम्मू और कश्मीर बैंक लिमिटेड के खिलाफ दायर मुकदमे की सुनवाई कर रही थी। इसमें ऋण की प्रक्रिया के लिए आवेदन शुल्क या अग्रिम शुल्क के रूप में बैंक को भुगतान किए गए लगभग 17.92 लाख रुपये की वसूली का अनुरोध किया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि मूल स्वीकृति पत्र के अनुसार वह आवेदन शुल्क की वापसी की हकदार थी। ऐसे में प्रतिवादी बैंक, ऋण आवेदन पर कार्रवाई करने व मूल लिखित शर्तों के अनुसार प्रसंस्करण शुल...
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