अररिया, जनवरी 7 -- अररिया, निज संवाददाता वह महज 12 साल का था, जब गांव के ही तीन लोगों ने बनारस के एक मदरसा में भर्ती कराने के नाम पर उसे ले जा कर बनारस के कालीन फैक्ट्री में रख दिया। ये 2010 की बात है। दस दिन कालीन फैक्ट्री में रखने के बाद उसे मानव तस्करों के हाथ 16 लाख में बेच दिया गया। इसके बाद उसे नागालैंड ले जाया गया और वहां से म्यांमार लोहे की सरिया बनाने की फैक्ट्री में भेज दिया गया। यही शुरू होती है उनकी यातनाओं की कहानी। उनकी दर्द भरी दास्तान सुनते हुए जब उसके शरीर पर नजर पड़ी तो वहां चोट, खरोंच और इंजेक्शनों के निशान भरे पड़े थे। 12 साल का बालक जमशेद उर्फ मुन्ना अब 27 साल का हो गया है और 15 साल तक पल-पल यातनाएं सह कर अपनी मां के पास पहुंच गया है। मंगलवार की सुबह मां के साथ उसने अपनी दर्द भरी दास्तान बताते हुए कहा कि म्यांमार में उस...
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