रांची, दिसम्बर 25 -- रांची, वरीय संवाददाता। 10 दिसंबर से शुरू हुए द महुआ फेस्टिवल का समापन गुरुवार को हो गया। आयोजन मंडी एड़पा और ट्राइब कार्ट ने 12 माइल स्थित सांगा विलेज में किया। अंतिम दिन असुर जनजातियों के पारंपरिक ज्ञान की सीधी प्रस्तुति की गई। आयोजक कपिल टोप्पो ने बताया कि आज 25 दिसंबर को लेकर दुनिया में बहुत भ्रम फैला हुआ है। कोई इसे केवल धार्मिक दिन मानता है, तो कोई इसे संयोग कहता है। कोई इसे एनर्जी एक्टिवेशन या ग्लोबल अलाइमेंट की तरह पेश करता है। लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा गहरी और वैज्ञानिक है। 25 दिसंबर कोई जादुई दिन नहीं, बल्कि यह उस खगोलीय घटना के तुरंत बाद का समय है, जिसे मानव सभ्यता हजारों वर्षों से पहचानती आ रही है।

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