नई दिल्ली, नवम्बर 25 -- देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पता चला है कि EWS श्रेणी के लगभग 140 से अधिक उम्मीदवारों ने पोस्टग्रेजुएट (PG) मेडिकल कोर्स में मैनेजमेंट और एनआरआई कोटा के तहत सीटें हासिल की हैं- जिनकी ट्यूशन फीस ही 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये से अधिक प्रति वर्ष तक है। गौरतलब है कि भारत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 8 लाख रुपये है। यह सीमा सामान्य श्रेणी के उन परिवारों पर लागू होती है जो अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में नहीं आते। यदि किसी परिवार की कुल वार्षिक आय (वेतन, व्यवसाय, कृषि आदि सभी स्रोतों से) 8 लाख रुपये से कम है तथा परिवार...
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