मुजफ्फरपुर, फरवरी 7 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। आपराधिक मामले में ट्रायल के दौरान वादी, पीड़ित व घायल गवाही में अपने पूर्व के बयान से मुकर जाए तो उसे पक्षरोधी करार दिया जाता है। ऐसी स्थिति में आईओ और डॉक्टर की गवाही नहीं कराई जाएगी। हाईकोर्ट ने इसे न्यायालय के महत्वपूर्ण समय की बर्बादी माना है। इस संबंध में हाईकोर्ट के प्रभारी महानिबंधक ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दिशा निर्देश संबंधी पत्र भेजा है। इसे सभी कोर्ट के पीठासीन पदाधिकारी, लोक अभियोजक व अपर लोक अभियोजकों को रिसीव कराया गया है। दरअसल, ट्रायल के दौरान वादी, पीड़ित व घायलों के मुकरने के बाद भी मामले की जांच करने वाले आईओ व घायल का इलाज करने वाले डॉक्टर की गवाही कराई जाती थी। इन दोनों की गवाही के लिए मामला लंबित रहता था। इससे ऐसे मामले के निष्पादन में समय लगता था।...
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