झांसी, नवम्बर 19 -- ..बूढे़ भारत में आई फिर से नई जवानी थी, ..बुंदेले हर बोले के मुंह हमने सुनी कहानी थी, ..खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी'। सड़कों पर गूंजती पंक्तियां, ..घोड़े पर सवार 1857 के गदर के सिपाही, ..हाथों में तलवार, लक्ष्मीबाई के स्वरूप में बालिाएं, बुंदेलों की मौजूदगी और मौका आजादी की अलख जगाने वाली दीपशिखा लक्ष्मीबाई के जन्मदिन का। बुधवार गांवों से शहर तक झासी की रानी लक्ष्मीबाई को जनमोत्सव शान से मनाया गया। महारानी लक्ष्मीबाई जन्म दिवस महासमिति के बैनर तले शोभायात्रा यात्रा निकाली गई। शहर की सड़कों पर खूब तिरंगा लहराया। जगह-जगह कार्यक्रम हुए। गोष्ठियां हुई। रानी लक्ष्मीबाई की शान में कसीदे पढे़ गए। 1857 के गदर के किस्से सुनाए गए। वहीं शाम को कई जगह दीपदान कार्यक्रम हुआ। महारानी लक्ष्मीबाई पार्क, किला, रानी महल सहित अन...
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